

देवरी. खरीफ धान बुआई के लिए जुताई में तेजी आई है. इस काम के लिए मजदूरों की जरूरत पड़ रही है. मजदूरी दर 70 रु. बढ़कर 80 रु. हो गई है, वहीं डीजल दर वृध्दि से कृषि कार्य में लगने वाले वाहन का किराया 400 रु. बढ़कर 500 रु. हो गया हैं. पहले खेतों में काम करने के लिए मजदूर तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर जाया करते थे. अब किसानों को अपने वाहन लेकर मजदूरों को लाने के लिए सुबह उनके घर जाना पड़ रहा है. दूसरे गांवों के मजदूरों को ढूंढ़ने व उन्हें अपने खेतों तक ले जाने में भी काफी ईंधन खर्च हो रहा है. ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ रहा है.
पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे आम आदमी की कमर टूट रही है. ईंधन मूल्य वृध्दि के परिणामों से किसान भी बच नहीं पा रहे हैं. उसका दरवृध्दि का असर किसानों पर भी पड़ रहा है. ज्यादातर किसान ट्रैक्टर की मदद से खेती करते हैं. इसके कारण किराए में बढ़ोतरी हो रही है. पिछले कुछ महीनों से ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इस हफ्ते पेट्रोल व डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है. फिलहाल पेट्रोल की कीमत करीब 105 रु. प्रति लीटर है, जबकि डीजल की कीमत 100 रु. प्रति लीटर पर पहुंच गया है. इसलिए आम नागरिकों के साथ ही मध्यम वर्ग, कर्मचारी और किसान अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं. इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया दिखाई दे रहे है. किसान इस समय खरीफ की बुआई की तैयारी कर रहे हैं. तहसील के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसान ट्रैक्टर से खेती कर रहे हैं.
पेट्रोल व डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रैक्टरों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यों के किराए में भी वृद्धि हुई है. ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों, श्रमिकों और हर व्यवसाय को हर स्तर पर प्रभावित कर रही है. पिछले कुछ दिनों से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है. नतीजतन सोशल मीडिया पर भी नाराजगी की प्रतिक्रियाएं वायरल हो रही हैं. जिस तरह ईंधन की कीमतों में रोजाना बढ़ोतरी हो रही है. उसी तरह वाट्सएप व फेसबुक जैसी सोशल साइट्स पर इसे लेकर तीव्र नाराजगी दर्ज की जा रही है.
जहां आम जनता ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान है. वहीं किसानों को भी इसे लेकर दिक्कतें आ रही है. पेट्रोल की कीमत 105 रु. से नीचे व डीजल 100 रु. तक पहुंच गया है. यह कीमतें कम होंगी ऐसी अपेक्षा किसानों को थी. उसके बाद भी जैसे-जैसे मूल्य वृद्धि का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, नागरिकों के साथ-साथ किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है.